Friday, 21 February 2020

Published February 21, 2020 by with 2 comments

HINDI SHAYARI

HINDI SHAYARI



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HINDI SHAYARI


फ़लसफ़े समझो न असरारे सियासत समझो,
जिंदगी सिर्फ हकीक़त है हकीक़त समझो,
जाने किस दिन हो हवायें भी नीलामी यहाँ,
आज तो साँस भी लेते हो ग़नीमत समझो।


समझने ही नहीं देती सियासत हम को सच्चाई,
कभी चेहरा नहीं मिलता कभी दर्पन नहीं मिलता।


समझने ही नहीं देती सियासत हम को सच्चाई,
कभी चेहरा नहीं मिलता कभी दर्पन नहीं मिलता।


बुलंदी का नशा सिमतों का जादू तोड़ देती है,
हवा उड़ते हुए पंछी के बाज़ू तोड़ देती है,
सियासी भेड़ियों थोड़ी बहुत गैरत ज़रूरी है,
तवायफ तक किसी मौके पे घुंघरू तोड़ देती है।


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सियासत इस कदर अवाम पे अहसान करती है,
आँखे छीन लेती है फिर चश्में दान करती है।


ऐ सियासत तूने भी इस दौर में कमाल कर दिया,
गरीबों को गरीब अमीरों को माला-माल कर दिया।


लड़ें, झगड़ें, भिड़ें, काटें, कटें, शमशीर हो जाएँ,
बटें, बाँटें, चुभे इक दुसरे को, तीर हो जाएँ,
मुसलसल कत्ल-ओ-गारत की नई तस्वीर हो जाएँ,
सियासत चाहती है हम और तुम कश्मीर हो जाएँ।


सियासत को लहू पीने की लत है,
वरना मुल्क में सब ख़ैरियत है।


सियासत को लहू पीने की लत है,
वरना मुल्क में सब ख़ैरियत है।


सियासत की दुकानों में रोशनी के लिए,
जरूरी है कि मुल्क मेरा जलता रहे।

जो तीर भी आता वो खाली नहीं जाता,
मायूस मेरे दिल से सयाली नहीं जाता,
काँटे ही किया करते हैं फूलों की हिफाज़त,
फूलों को बचाने कोई माली नहीं जाता।

वक्त कहता है कि फिर नहीं आऊंगा,
तेरी आँखों को अब न रुलाऊंगा।
जीना है तो इस पल को जी ले,
शायद मैं कल तक न रुक पाऊंगा।

ना जाने कितनी अन कही बातें,
कितनी हसरतें साथ ले जाएगें
लोग झूठ कहते हैं कि
खाली हाथ आए थे और खाली हाथ जाएगें।

अब ना मैं हूँ, ना बाकी हैं ज़माने मेरे​,
फिर भी मशहूर हैं शहरों में बसाने मेरे​,
ज़िंदगी है तो नए ज़ख्म भी लग जाएंगे​,
अब भी बाकी हैं कई दोस्त पुराने मेरे।

टू भी चलती थी तो बंदे-दबा कहते थे,
गांव फैलाते अंधेरा को दिया कहते थे,
उनका अंजाम मुझे याद नही है शायद,
और भी लोग थे जो खुद को खुला कहते थे।

हाथ ख़ाली हैं तेरे शहर से जाते जाते,
जान होती तो मेरी जान लुटाते जाते,
अब तो हर हाथ का पत्थर हमें पहचानता है,
उम्र गुज़री है तेरे शहर में आते जाते।

चेहरों के लिए आईने क़ुर्बान किये हैं,
इस शौक में अपने बड़े नुकसान किये हैं,​
महफ़िल में मुझे तालियाँ देकर है बहुत खुश​,
जिस शख्स पर मैंने बड़े एहसान किये है।

​तेरी हर बात ​मोहब्बत में गँवाना करके​,
​दिल के बाज़ार में बैठे हैं खारा करके​,
​मैं वो एरिया हूँ कि हर मूंद पंवर है जिसकी​,​​
​तुमने अच्छा ही किया मुझसे किनारा करके।


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2 comments:

  1. Please visit www.parnassianscafe.com for more shayari

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  2. Very nice Collection Thanks For the article

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